कुछ सत्य के अघात अप्रत्याशित होते हैं , तीव्र पीड़ा असीम हो उठती है। कुछ सत्य के अघात अप्रत्याशित होते हैं , तीव्र पीड़ा असीम हो उठती है।
सत्य के कितने कोण सत्य के कितने कोण
बहाना बन जाता है जाना सबको है पर इस सच्चाई से हर कोई घबराता है काश कोई इसे समझ पाता बहाना बन जाता है जाना सबको है पर इस सच्चाई से हर कोई घबराता है काश कोई इसे ...
कृष्णा सा श्यामला, राधा सा शस्य यही। तो क्यों न मीरा सा इसका भी विषपान किया जाए। कृष्णा सा श्यामला, राधा सा शस्य यही। तो क्यों न मीरा सा इसका भी विषपान किया ज...
जिस पथ का राही था मैं तो, प्यास रही थी जिसकी मूझको, निज सत्य का उदघाटन करना, जिस पथ का राही था मैं तो, प्यास रही थी जिसकी मूझको, निज सत्य का उदघाटन करना,
रहूं निर्मोही ये बस में नहीं रहूं निर्गुण ये कर न पाता रहूं निर्मोही ये बस में नहीं रहूं निर्गुण ये कर न पाता